What is Requirement Analysis and Modelling? | Analysis Modeling in Software Engineering

Requirement analysis, किसी software project के सफलता एवं विफलता के लिए महत्वपूर्ण होता है। Software development process एवं system engineering process का  यह पहला step होता है क्योंकि जब कोई software develop किया जाना है तो उसके लिए customer के आवश्यकताओं को समझना होगा | 

What is Requirement Analysis and Modelling ?

System engineering एवं software engineering में requirement analysis के कार्य शामिल होते हैं। इन कार्यों में नये product या बदले हुए product या project के लिए मिलने वाली जरूरतो या स्थितियों का निर्धारण सम्मिलित होते हैं। विभिन्न stakeholder के आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दस्तावेज तैयार करना, विश्लेषण करना या प्रबंध करने को requirement analysis कहा जा सकता है।

Requirement analysis के द्वारा software की आवश्यकताओं को समझने, उन्हें वर्गीकृत करने, संगठित करने एवं व्यख्या करने का कार्य कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त requirement analysis के द्वारा निम्न कार्य भी किया जाता है:

  1. Software operating system के environment में किस प्रकार चलेगा और कैसे व्यवहार करेगा इसका निर्धारण करते हैं।
  2. ग्राहक के समस्या के अनुसार उसे किस प्रकार के software कि आवश्यकता है। 
  3. Software की आवश्यकताओं के विश्लेषण के लिए एक analysis model विकसित करना।
  4. कभी-कभी अस्पष्ट एवं अनिर्दिष्ट आवश्यकताएं भी होती है जिससे conflict पैदा होता है इसे कैसे दूर करना है इसका निर्धारण करना।
  5. अंतिम उत्पाद से ग्राहक संतुष्ट होगा या नहीं इसका विश्लेषण करना।

What is Requirement Model ?

System के पहले तकनीकी रूप को requirement model कहते हैं। Software engineers के द्वारा ग्राहकों से प्राप्त आवश्यकताओं की जानकारी के अधार पर requirement model तैयार किया जाता है। Requirement modeling के द्वारा software की आवश्यकताएं (data, function एवं behavior) को तैयार करने के लिए text एवं drawing का उपयोग किया जाता है। इस requirement model में निम्न तत्व होते हैं:

i) Scenario based:

इसमें उपयोगकर्ता system को किस प्रकार देखता है इसे समझने का प्रयास किया जाता है।

ii) Data:

इसमें यह प्रदर्शित किया जाता है कि data, system के अन्तर्गत किस प्रकार data को स्थानांतरित करता है।

iii) Behavioral: 

इसमें system की वर्तमान स्थिति पर घटनाओ का क्या असर होगा इसे प्रदर्शित किया जाता है।

iv) Class oriented:

इसमें object, attributes एवं relationship को परिभाषित किया जाता है।

v) Flow-oriented: 

इसमें भी data based की तरह यह प्रदर्शित किया जाता है कि data, system के अन्तर्गत किस प्रकार data को स्थानांतरित करता है।

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Analysis Modeling approaches:

Analysis model तैयार करके आवश्यकताओं में आयी असंगतिया और चूक को दर्शाने का कार्य कर सकते हैं। Analysis modeling approaches दो प्रकार के होते हैं:

  1. Structure analysis
  2. Object-oriented analysis

1) Structure Analysis:

Structure analysis में data और process होते हैं जिसमें data एक separate entities के रूप में होता है। इन्हें इस प्रकार समझते हैं:

Data:

Data object एक modeled है जिसे उसके relationship और attributes के रूप में परिभाषित किया जाता है।

Process:

Process एक modeled है जो data, system में एक स्थान से दूसरे स्थान कैसे जाता है इसे प्रदर्शित करने का कार्य करता है।

Data modeling concepts:

यह कुछ औपचारिक तकनीक को लागू करके information  system के लिए data model बनाने की प्रक्रिया होती है। जिस प्रकार Data के flow को दर्शाने के लिए text और symbol का उपयोग किया जाता है ठिक उसी प्रकार कठीन software system के design समझाने के लिए चित्र के रूप में आरेखित करने की प्रक्रिया को data modeling कहते हैं। 

इस प्रकार चित्र के रूप में आरेखित diagram की मदद से नया software बना सकते हैं या पहले से बने software को पुनः नये सिरे से परिभाषित कर सकते हैं। Data modeling process को निम्न diagram के माध्यम से समझ सकते हैं :

requirement analysis and process modeling
data modeling process in software engineering

यदि कोई application develop किया जा रहा है उसके data की आवश्यकता के लिए conceptual data model होता है एवं उस data को किस प्रकार व्यवस्थित रखना है इसे निर्धारित करने के लिए physical data model उपयोग होता है।

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2) Object oriented Analysis:

Object oriented analysis, ग्राहको की आवश्यकताओं को प्रभावित करने एवं classes को परिभाषित करने पर केंद्रित होता है।

i) Conceptual model:

महत्वपूर्ण वस्तुओं की पहचान करें, उनमें सुधार करे, उनके व्यवहार और relation को परिभाषित करके simple diagramबनाये। 

ii) Elicit requirements:

यह परिभाषित करें कि software का उद्देश्य क्या है और उसे बनाने में किस प्रकार कि समस्या आ रही है।

iii) Specify requirements:

आमतौर पर होने वाले गतिविधिया या उपयोगकर्ता द्वारा बताए गए stories के अधार पर आवश्यकताओं का वर्णन करना होता है।

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