What is a Software Engineering Practice | PDF Notes in Hindi

 What is Software Engineering Practice?

Software engineering से software कैसे बनाना है इसका निर्धारण किया जाता है अर्थात् उसका road map तैयार होता है और practice से उस software का detail प्राप्त कर सकते हैं। जिससे उसे चलाया जा सके। Software की planning करते समय methode, tools, principle तैयार करने को software  engineering practice कहा जाता है। 

software engineering practice
Software engineering practices PDF


इसका उद्देश्य एक high quality computer software बनाना होता है। इसे software engineering एवं उनके manager के द्वारा उपयोग किया जाता है।  Software engineering practice के निम्न चार phases होते हैं।

  1. Understand the problem.
  2. Plan the Soluation.
  3. Carry out the plan.
  4. Examine the result.

i) Understand the problem:

इसमें समस्या पर विचार विमर्श करके उसका analysis किया जाता है साथ ही निम्न प्रकार समस्या को देखा जाता है-

  • समस्या का समाधान कैसे मिलेगा और कौन समस्या का समाधान कर सकता है इस पर विचार किया जाता है।
  • समस्या का समाधान करने के लिए किस प्रकार के data, function और behavior की आवश्यकता होती है।
  • समस्या को सरलता से हल करने के लिए क्या उसे टुकड़ो में बॉटा जा सकता है या नहीं।
  • समस्या को समझने में आसान बनने के लिए क्या उसे graphics के रूप में बॉटा जा सकता है।

ii) Plan the Solution:

इसे modeling एवं software design की श्रेणी में रखा जाता है। इसमें समस्या के समाधान हेतु क्या किया जा सकता है। इस पर विचार किया जाता है और निम्न तत्व पर गौर किया जाता है: 

  • क्या पूर्व में ऐसी समस्या देखी गई है और यदि देखी गई है तो उसका समाधान किस प्रकार निकालया गया है इस पर विचार किया जाता है।
  • समस्या का समाधान समझने के लिए क्या किसी प्रकार का model तैयार किया जा सकता है।
  •  समस्या को हल करने के तरीके का प्रतिनिधित्व किया जा सकता है जिससे उस पर प्रभावी रूप से कार्यन्वयन हो ।
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iii) Carry out the plan

इस phase में code generation का कार्य किया जाता है। इस phase में निम्न तत्व पर गौर किया जाता है: 

  • क्या design model का source code दिया गया है।
  • इसमें जो design model उपयोग किया गया है वह सही है या नहीं इसकी जाँच की जाती है।
  • जो model तैयार किया गया है उसके लिए सबसे सटीक algorithm का उपयोग किया गया है या नहीं। 

(v) Examine the result:

इस phase में software द्वारा जो परिणाम दिया जा रहा है इसकी शुद्धता पर ध्यान केद्रित किया जाता है:

  • Software के testing कर उसके गुणवत्ता प्रमाणित होने चाहिए।
  • इसमें देखा जाता है कि परिणाम के प्रत्येक घटक का परिक्षण संभव है या नहीं।
  • यह भी देखा जाता है कि software सभी stakeholder की आवश्यकता के अनुरूप है या नहीं।
  • आवश्यक function, feature एवं behavior का उपयोग किया गया है या नहीं।

Types of software engineering practice:

Practices को निम्न प्रकारों में बाँटा जा सकता है:

  1. Communication practice
  2. Planning practice
  3. Modeling practice
  4. Construction practic
  5. Deployment Practice

What is Communication Practice?

  • इस practice का मुख्य सिद्धांत निम्नलिखित होता है: 
  • जो भी meeting होने वाली है उसका एक एजेंडा होना चाहिए।
  • वक्ता जो कह रहा है उसे ध्यानपूर्वकर सुनना।
  • समस्या का सामना होने से पहले ही उसे समझना एवं उस पर research कर लेना।
  • सामान्यत: face to face communication की सबसे अच्छा माना जाता है परंतु जो discussion होने जा रहा है उसका documentation करके रखना चाहिए।
  • Document से संबंधित notes होने आवश्यक है।
  • आम सहमती बनाने का प्रयास करें।
  • एक विषय पर ध्यान केंद्रित करे और अपने discussion को modularize करें 
  • यदि कोई topic स्पष्ट नहीं है तो उसे समझाने के diagram का उपयोग करे। 

What is Planning practice?

इस practice का मुख्य सिद्धांत निम्नलिखित होता है:

  • जो project तैयार किया जा रहा है उसका scope कहा तक इसे समझने का प्रयास करें।
  • जो भी planning कर रहे है उसमें जो कार्य होना है उस उपयोगकर्ता एवं ग्राहक को भी शामिल करे।
  • Planning को आकर्षक बनाने पर जोर देना चाहिए।
  • आप सोच रहे है उसके अधार पर planning की योजना बना चाहिए।
  • Plan में जो भी जोखिम बताया गया है उस पर ध्यान केंद्रि करें।
  • वास्तव में plan को सही प्रकार से लागू करने के लिए प्रत्ये व्यक्ति की भूमिका सुनिश्चित करें।
  • Plan को समय-समय पर trace करते रहें और उस आवश्यकतानुसार समायोजन करते रहें।

What is Construction Practice?

Practice में coding करने से पूर्व एवं coding के चल समय निम्न सिद्धांत होते हैं: 

  • सबसे पहले समस्या को समझ कर उसे हल करने का प्रयास किया जाता है।
  • Basic design के concept एवं सिद्धांत को समझा आवश्यक होता है।
  • उस programming भाषा का चयन करे जो software जरूरतों को पूरा करती हो।
  • Code के पूर्ण होने के बाद लागू करने के लिए unit test एक set बनाना होता है।
  • Structure programming तक अपने algorithm तक सीमि करे।
  • Design के लिए सबसे best data structure का चुनाव कार्य इसी practice में किया जाता है।'
  • इस practice में software के architecture को समझक interface के साथ उसका तालमेल बैठाने का प्रयास किया जात है।
  • Condition को जितना हो सके simple बनाकर रखें।
  • Self documenting के लिए code लिखें।

What is Modeling practice?

इस practice का मुख्य सिद्धांत निम्नलिखित होता है।

  • इसमें software को प्रदर्शित करने वाले कार्यों का निर्धारण किया जाता है।
  • बाहरी घटनाओं के कारण होने वाले software के व्यवहार परिवर्तन को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
  • समय-समय पर software का analysis किया जाना चाहिए।
  • Analysis कार्य को move करते हुए कार्यन्वयन की ओर ले जाना चाहिए। 
  • इसमें software के व्यवहार को निश्चित रूप से रेखांकित करना होता है।
  • इसमें मुख्य रूप से software design की practice की जाती
  • Software design, analysis model के लिए traceable होना आवश्यक होता है।
  • Processing function के लिए data का design आवश्यक होता है। software
  • जब system का निर्माण हो रहा हो तो architecture पर ध्यान दिया जाता है।
  • आंतरिक एवं बाहरी interface को बहुत ही ध्यानपूर्वक तैयार किया जाना चाहिए।
  • User interface का निर्माण अंतिम उपयोगकर्ता की आवश्यकताओ को ध्यान में रखकर ही किये जाने चाहिए।
  • Designed components स्वतंत्र रूप से कार्य करने के लिए परिभाषित करना आवश्यक होता है।
  • आंतरिक वातावरण से components कमजोर तरीके से जुड़ा हुआ होता है।
  • Design को इस प्रकार प्रस्तुत करना होता है जिससे उसे किसी भी बाहरी व्यक्ति के द्वारा सरलता से समझा जा सके।
  • Design को एकदम सामान्य बनाना चाहिए जिससे उसे सरलता से समझा जा सके। हमेशा यह प्रयास करना चाहिए की design में सादगी बनी रहे।

What is Deployment practice?

  • इस practice का मुख्य सिद्धांत निम्नलिखित होता है:
  • इस practice में software को ग्राहक के आवश्यकतानुसार साफ-सुथरा बनाने का कार्य होता है।
  • Product के पूर्ण हो जाने के पश्चात् अच्छी तरह से जॉच किया जाता है यदि कोई त्रुटी होती है तो उसे दूर करते हैं।
  • Product को ग्राहक को सौपने से पूर्व उससे संबंधित support product का निर्माण किया जाता है ताकि उसे चलाने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। 
  • Software के bug को हटाने के पश्चात् ही customer को deliver किया जाता है। 
  • अंतिम उपयोगकर्ता के द्वारा जब यह तय कर लिया जाता है कि software में किसी प्रकार कोई समस्या नहीं है तो ही उसे pass किया जाता है।
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