Video Display Devices in Computer Graphics – in Hindi

What is Video Display Devices And Its Types In Hindi
Video Display Devices in Computer Graphics

What is display devices | पिछले आर्टिकल में मैंने आप लोगो को बताया था की कंप्यूटर ग्राफ़िक्स क्या होता है What is Computer Graphics and its Types in Hindi अगर आप इसके बारे में नहीं जानते है तो प्लीज पहले इस लिंक में क्लिक करके आर्टिकल को पढ़ ले उसके बाद ही इस आर्टिकल को पढ़े तभी आपको अच्छी से समझ में आएगा , तो चलिए पढना स्टार्ट करते है :

    What is Display Device – डिस्प्ले डिवाइस क्या है ?

    Display Devices computer का output device है Computer से output तीन प्रकार से प्राप्त कर सकते है पहला screen पर देखकर, दूसरा paper पर print करके एवं तीसरा sound के रूप में सुनकर। display devices में अधिक screen (Monitor) का प्रयोग होता है क्योंकि computer में लगभग सभी कार्य को करते समय उसके output को screen पर देखने की आवश्कयता होती है।

    display devices इसी screen (monitor) को Video Display Device कहा जाता है। इस Video Display Device के कार्य को विस्तार से समझते हैं।

    Components of Video Display Device:

    इसके निग्न तीन components होते हैं

    1.  A digital memory
    2.  A display unit
    3. A display controller

    i). A Digital Memory:

    इसे frame buffer भी कहा जाता है इसमें video display device पर प्रदर्शित होने वाली image एक matrix के रूप में संग्रहित होती है।

    ii.) A Display unit:

    Display unit को monitor भी कहा जा सकता है यह computer का सबसे महत्वपूर्ण output device है इसे निम्न प्रकारों में विभाजित कर सकते है :

    iii.) A display controlar: 

    यह digital memory (frame buffer) से monitor को content pass करने के लिए interface का कार्य करता है।इस digital memory s image binary digiral number format होता हैं। यह binary digital number, picture element या pixel को rectangular array के रूप में प्रस्तुत करने का कार्य करता है। Pixel screen का सबसे बेटा तत्व होता है। इसे 0 एवं 1 के रूप प्रस्तुत किया जाता है।

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    जब भी हम screen पर प्रदर्शित किसी तत्व को बदलना चाहते है तो हमें digital memory में उसे संग्रहित करना होगा। Image को CRT screen पर generate करने हेतु computer graphics terminal में निम्न दो basic तकनीक का प्रयोग किया जाता है –

    1. Random Scan
    2. Raster Scan

    1. Random Scan:

    यह electron beam का प्रयोग करता है, जो एक सामान्य pencil की तरह होता है। जिसके द्वारा Screen पर line image को generate किया जाता है। प्रत्येक line, screen के एक से दूसरे पॉइंट तक मूव की जाती है जैसे :
    what is Random Scan Display Devices in hindi

    हर एक point को x , y cardinals के द्वारा define किया जाता है । इस process का प्रयोग केवल straight line हेतु किया जाता है । एक smooth curve बनाने हेतु lines को connect किया जाता है ।

    2. Raster scan :

    Raster scan में screen को छोटे – छोटे pixels में बांटा जाता है । किसी display screen में pixels की सीमा 256×256 से 1024×1024 तक की होती है । Screen का प्रत्येक pixel अलग – अलग चमक लिये हुये होता है ।

    What is Raster Scan in Computer Graphics In Hindi Display Devices

    इन्हीं pixels को अलग – अलग रंग एवं चमक में colors screen के द्वारा प्रदर्शित किया जाता है । जब screen पर image को प्रदर्शित किया जाता हैं तो उस image के प्रदर्शन के लिए electron beam horizontal line ger left to right image on create करते हैं । एक line complete हो जाने पर electron beam नीचे की next line में process करते हैं ।

    Types Of Display Devices in Computer Graphics in Hindi

    इसे designe या पीढ़ी के अधार पर निम्न 5 प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है ।

    1. CRT (Cathode Ray Tube):

    Display device के रूप में CRT(Cathode Ray Tube) का प्रयोग किया जाता है। आम तौर पर घरों में प्रयोग होने वाले television में भी इसी प्रकार के display device का प्रयोग होता हैं, जिन्हें picture tube कहा जाता है। चूंकि इसमें vacuum tube का उपयोग किया जाता है। जिसके द्वारा tube पर एक electron gun fire किया जाता है जिससे प्रतिसिंद बनती है।

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    CRT में evacuated glass लगा होता है, जिसमें phosphor के बिंदुओ का प्रयोग होता है। जिसमें तीन रंग (RGB (Red,Green,Blue)) के electron beam को screen पर अलग-अलग अनुपात में focus किया जाता है, जिससे screen पर लगे phosphor में कुछ सेकेन्ड के लिए एक चमक आ जाती है। Beam का प्रयोग CRT Screen पर picture को generate करने हेतु किया जाता है।.CRT के कार्य को निम्न चित्र से समझ सकते हैं:

    what is CRT in Display Devices Computer Graphics in Hindi

    2. LCD (Liquid Crystal Display):

    LCD flat screen monitor sa 21 Liquid Crystal Display शब्द से इसके कार्य करने की तकनीक का पता चलता है,अर्थात् यह graphics के प्रदर्शन के लिए sceeen पर liquid flow करता है। इसने CRT monitor को replace किया और अधिक राजन, अधिक जगह एवं बिजली की अधिक खपत करने वाले monitor के युग की समाप्ति हो गई। यह हर प्रकार से सुविधाजनक है।

    इसी monitor में modification करते हुए LED और plasma monitor तैयार किया गया जो धीरे-धीरे LCD monitor को replace कर रहा है।

    3. Direct View Storage Tube :

    Direct View Storage Tube Cathode-Ray Tube का ही एक क्लास है जो एक इमेज को लंबे समय तक रखने के लिए बनाया गया है।यह इमेज को तब तक रखता है जब तक ट्यूब को बिजली की आपूर्ति न हो जाये।

    DVST CRT जैसा ही दिखता है क्योंकि यह इमेज को प्रदर्शित करने के लिए Electron Gun का उपयोग करता है और इसे Perform करने के लिए Phosphore Coated Screen का उपयोग करता है ।
    इससे लगातार छवि को फिर से लिखने की आवश्यकता से बचा जाता है।

    Advantage And Disadvantage of DVST :

    • इसमें प्रयुक्त फॉस्फोर उच्च दृढ़ता का है।
    • DVST चित्र परिभाषा को संग्रहीत करने के लिए ताज़ा बफर या फ़्रेम बफर का उपयोग नहीं करता है।
    • चित्र परिभाषा सकारात्मक चार्ज वितरण के रूप में CRT के अंदर संग्रहीत की जाती है। इस कारण से DVST को Storage Type CRT के रूप में जाना जाता है।
    • DVST में रिफ्रेशिंग की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि DVST पर खींची गई परिणाम तस्वीर को लुप्त होने से पहले कई मिनटों तक देखा जाएगा।
    • एनीमेशन जैसे गतिशील ग्राफिक के लिए उपयोग नहीं किया जाता है। ये सिस्टम रंग प्रदर्शित नहीं करते हैं।
    • एक छवि के चयनित हिस्से को मिटाने के लिए, पूरे स्क्रीन को मिटाने की जरूरत है और संशोधित चित्रों को फिर से तैयार करने की आवश्यकता है।

    4. Plasma Display –

    यह LCD से ज्यादा अच्छा और चमकीले होते है प्लाज्मा डिस्प्ले एक कंप्यूटर वीडियो डिस्प्ले है जिसमें स्क्रीन पर प्रत्येक पिक्सेल को थोड़ा सा प्लाज्मा या आवेशित गैस द्वारा कुछ हद तक एक छोटे नीयन प्रकाश की तरह प्रकाशित किया जाता है।

    प्लाज्मा डिस्प्ले कैथोड रे ट्यूब (CRT) डिस्प्ले की तुलना में पतले होते हैं और लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले (LCD) से अधिक चमकीले होते हैं। इसे चित्र के माध्यम से समझा जा सकता है –

    what is plasma display in Computer Graphics in Hindi

    Advantage And Disadvantage Of Plasma Display :

    • यह CRT से अच्छा पर स्लिम Body होती है जिसे दीवार पर चढ़ा जा सकता है|
    • रियर-प्रोजेक्शन या अन्य विडियो डिस्प्ले की तुलना में में कम भारी होती है और जगह भी कम लेता है ।
    • बेहतर Quality वाले चित्र, गहरे काले रंग का उत्पादन करता है ।
    • एलसीडी या OLED आधारित टीवी की तुलना में भारी होता है ।
    • Screen बर्न-इन और इमेज रिटेंशन के लिए अतिसंवेदनशील, हालांकि अधिकांश हाल ही के मॉडल में एक पिक्सेल ऑर्बिटर है जो पूरी तस्वीर को मानव आंखों की तुलना में तेजी से स्थानांतरित करता है, जो बर्न-इन के प्रभाव को कम करता है, लेकिन बर्न-इन को रोकता नहीं है।

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    5. LED –

    इसका पूरा नाम Light Emitting Diode है । आप जानते है की LED क्या होता है क्या आप एक बिना सुई वाले जिसमे mobile की तरह नंबर द्वारा समय तारीख को बताता है उस टाइप के घडी (वाच ) पहने हो अगर हाँ तो उसे ही LED डिस्प्ले कहा जाता है । जिसका use - घडी,कैलकुलेटर old Mobile Phones, Telivision आदि में किया जाता है ।

    What is LED Display Devices In Computer Graphics In Hindi

    एक LED Display, या light Emitting Diode Display, एक Plat पैनल डिस्प्ले है जो Video Display के रूप में लाइट एमिटिंग डायोड का उपयोग करता है। एक एलईडी डिस्प्ले पैनल या तो एक छोटा डिस्प्ले या बड़े डिस्प्ले का हिस्सा हो सकता है। एलईडी डिस्प्ले बनाने के लिए एलईडी डायोड का उपयोग किया जाता है। LED Display का Use आप होर्डिंग और स्टोर संकेतों में भी कर सकते हैं ।

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    सबसे सरल शब्दों में कहे जाये तो ” एक Light Emitting Diode एक अर्धचालक उपकरण है जो प्रकाश का उत्सर्जन करता है। जब एक विद्युत प्रवाह इसके साथ गुजरता है , तब प्रकाश उत्पन्न होता है । जब कण (जिसे इलेक्ट्रॉनों और छिद्रों के रूप में जाना जाता है) को अर्धचालक पदार्थ के भीतर एक साथ संयोजित किया जाता है।“

    Advantage And Disadvantage Of LED:

    • यह कम वोल्ट लेता है ।
    • एल ई डी रंग फिल्टर के उपयोग के बिना एक इच्छित रंग के प्रकाश का उत्सर्जन कर सकते हैं जो पारंपरिक प्रकाश विधियों की आवश्यकता होती है।
    • इसकी साइज़ बहुत कम होती है और ह्ल्हा भी होता है ।
    • एल ई डी वर्तमान में अधिक पारंपरिक प्रकाश प्रौद्योगिकियों की तुलना में प्रारंभिक पूंजीगत लागत के आधार पर अधिक महंगे हैं, प्रति लुमेन मूल्य। अतिरिक्त खर्च आंशिक रूप से कम लुमेन आउटपुट और ड्राइव सर्किट्री और बिजली की आपूर्ति से उपजा है।

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    अंतिम शब्द –

    हेल्लो स्टूडेंट्स … आज हमने पढ़ा कंप्यूटर ग्राफ़िक्स का एक भाग विडियो डिस्प्ले डिवाइसेस और इसके प्रकार ।फ्रेंड्स आशा करता हूँ की आपको ये आर्टिकल अच्छा लगा और आप इस आर्टिकल को अपने फ्रेंड्स से शेयर करेंगे ।

    अगर इस आर्टिकल से रिलेटेड कोई भी प्रश्न है तो प्लीज हमसे कमेंट बॉक्स में पूछियेगा । अब मिलते है next आर्टिकल में तब तक के लिए अलविदा ।

    जय हिन्द जय भारत जय छत्तीसगढ़

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